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song
झोखा हवा का आज भी जुल्फे उड़ाता होगा ना बालो मे तेरे आज भी फूल कोई जचता होगा ना तेरा दुपट्टा आज भी तेरे सर से सरकता होगा ना काग़ज़ पे मेरी तस्वीर जैसे कुछ तो बनाती होगी ना उलट-पलट के देख के उसको जी भर के हस्ती होगी ना हस्ते-हस्ते आँखे तुम्हारी भर-भर आती होगी ना मुझको ढाका था धूप मे जीस्सी वो आँचल भिगो ती होगी ना क्या तुम मेरे इन सब स्वालो का कुछ तो जवाब दोगी ना.
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